EPFO Pension: कर्मचारियों की पेंशन पर संकट, क्या मोदी सरकार देगी राहत या फिर होगा बड़ा आंदोलन?

EPFO Pension News: देशभर के करोड़ों EPFO सदस्य और पेंशनर्स एक बार फिर गहरी चिंता में हैं। 2025-26 के लिए श्रम और रोजगार मंत्रालय को आवंटित अनुदानों पर संसद की स्थायी समिति ने बड़ा बयान देते हुए न्यूनतम मासिक पेंशन में बढ़ोतरी की सिफारिश की है। लेकिन क्या सरकार वाकई इसमें कोई बदलाव करेगी या फिर पेंशनर्स को सिर्फ आश्वासन ही मिलेगा?

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EPFO Pension: 10 साल से ₹1,000 में गुजारा करने को मजबूर पेंशनर्स!

आपको जानकर हैरानी होगी कि मौजूदा समय में कर्मचारी पेंशन योजना के तहत न्यूनतम मासिक पेंशन केवल ₹1,000 है! यह वही राशि है जिसे अगस्त 2014 में तय किया गया था, लेकिन तब से लेकर अब तक इसमें कोई बदलाव नहीं हुआ। हैरानी की बात यह है कि बीजेपी सरकार आज भी इस पेंशन बढ़ोतरी का श्रेय खुद को देती है, जबकि असल में यह फैसला 2014 में UPA सरकार के कार्यकाल में लिया गया था।

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कर्मचारी पेंशन योजना: जब विपक्ष में रहते बीजेपी ने की थी ₹3,000 पेंशन की मांग!

इतिहास गवाह है कि जब 2014 में UPA सरकार ने ₹1,000 की न्यूनतम पेंशन तय की थी, तब विपक्ष में रही बीजेपी ने इसे अपर्याप्त बताया था। तत्कालीन बीजेपी नेता प्रकाश जावड़ेकर ने इसे ‘नगण्य’ बताते हुए ₹3,000 पेंशन की मांग की थी। अब सवाल यह है कि जब बीजेपी खुद सत्ता में है, तो फिर यह मांग पूरी क्यों नहीं हो रही?

EPFO Pension: बढ़ेगी पेंशन या फिर होगा नया बहाना?

वर्तमान में सरकार हर साल ₹980 करोड़ न्यूनतम पेंशन भुगतान के लिए आवंटित करती है। अगर इसे तिगुना करना है, तो यह राशि हजारों करोड़ तक जा सकती है। केंद्र सरकार EPS कोष में कर्मचारियों के वेतन का 1.16% योगदान देती है, जो ₹15,000 की वेतन सीमा पर निर्धारित है। 2024-25 में यह राशि बढ़ाकर ₹9,250 करोड़ कर दी गई है और 2025-26 में इसके ₹10,000 करोड़ से अधिक होने की संभावना है।

सरकार बार-बार अतिरिक्त वित्तीय बोझ का हवाला देकर बचने की कोशिश कर रही है, लेकिन सवाल यह है कि जब अन्य योजनाओं पर लाखों करोड़ खर्च किए जा सकते हैं, तो पेंशनर्स के लिए पैसा क्यों नहीं है? क्या यह सरकार की प्राथमिकताओं में नहीं है?

EPFO की लापरवाही से परेशान लाखों पेंशनर्स!

EPFO की धीमी कार्यशैली और गैरजिम्मेदार रवैया पेंशनभोगियों के लिए मुसीबत बन गया है।

  • हजारों पेंशनर्स, जिन्होंने अपने वेतन के आधार पर उच्च पेंशन का विकल्प चुना था, अब तक फैसले का इंतजार कर रहे हैं।
  • लाखों रुपये के डिमांड नोटिस भेजे जा रहे हैं, लेकिन यह नहीं बताया जा रहा कि कितनी पेंशन मिलेगी।
  • EPFO ने कोई आधिकारिक सूचना जारी नहीं की, बल्कि पेंशनधारकों को ऑनलाइन पोर्टल पर खुद गणना करने को कहा जा रहा है, जिसकी सटीकता पर भी सवाल उठ रहे हैं।

कर्मचारी पेंशन योजना में निजी कंपनियों के पेंशनर्स सबसे ज्यादा परेशान

सबसे बुरी हालत उन पेंशनर्स की है जो निजी कंपनियों में काम करते थे और जिनके संस्थान EPFO के कुछ नियमों से छूट प्राप्त थे।

  • कई आवेदनों को बिना किसी कारण के खारिज किया जा रहा है।
  • पहले से मंजूर की गई पेंशन को अचानक रोक दिया जा रहा है।
  • पेंशन बढ़ाने की मांग पर सिर्फ सरकारी लीपापोती चल रही है।

EPFO Pension को लेकर क्या होगा सरकार का अगला कदम?

अब देखना यह है कि मोदी सरकार इस मुद्दे पर क्या कदम उठाती है। क्या सरकार सच में पेंशनर्स की तकलीफ समझेगी और उनकी पेंशन बढ़ाएगी? या फिर यह मुद्दा भी अगले चुनावी वादों का हिस्सा बनकर रह जाएगा?

पेंशनर्स और कर्मचारियों को उम्मीद है कि इस बार सिर्फ घोषणाएं नहीं बल्कि ठोस कदम उठाए जाएंगे। अगर ऐसा नहीं हुआ तो आने वाले समय में देशभर में बड़े आंदोलन भी देखने को मिल सकते हैं!

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