राजस्थान सरकार ने किसानों के लिए बड़ी राहत दी। भजनलाल शर्मा ने PM-KUSUM योजना के तहत कृषि बिजली कनेक्शन तुरंत देने का फैसला किया।
राजस्थान के किसानों के लिए एक बड़ी खबर है! मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने PM-KUSUM योजना के तहत कृषि बिजली कनेक्शन तुरंत जारी करने की मंजूरी दे दी है। यह फैसला राज्य के लाखों किसानों के लिए गेम-चेंजर साबित होगा और उनकी ज़िंदगी को आसान बनाएगा।

क्या है यह बड़ा फैसला?
मुख्यमंत्री ने कृषि कनेक्शन नीति-2017 में एक अहम बदलाव किया है। अब राज्य की तीनों बिजली वितरण कंपनियों (DISCOMs) को यह निर्देश दिए गए हैं कि 33/11 केवी सब-स्टेशनों से जुड़े सौर ऊर्जा संयंत्रों वाले इलाकों में किसानों को बिजली कनेक्शन प्राथमिकता के साथ दिए जाएं।
इसका सीधा मतलब है कि अब किसानों को सालों तक लंबा इंतज़ार नहीं करना पड़ेगा। कनेक्शन की प्रक्रिया अब तेज़ी से और आसानी से पूरी की जाएगी।
किसानों को क्या लाभ मिलेंगे?
- प्राथमिकता डिमांड लेटर: सौर ऊर्जा संयंत्रों के पास के क्षेत्रों से आवेदन करने वाले किसानों को उनकी क्षमता के अनुसार प्राथमिकता के साथ डिमांड लेटर दिए जाएंगे।
- तेज़ कनेक्शन: डिमांड लेटर जमा होने के बाद, कनेक्शन तुरंत जारी कर दिया जाएगा। अब कट-ऑफ डेट का पुराना सिस्टम हटा दिया गया है, जिससे कागजी कार्रवाई में लगने वाला समय बचेगा।
- पेंडिंग आवेदन निपटाए जाएंगे: 22 फरवरी 2022 तक, लगभग 78,498 आवेदन लंबित पड़े हैं। इसके अलावा, 2,27,913 नए आवेदन भी आ चुके हैं। इस नए फैसले से इस बड़े बैकलॉग को तेज़ी से कम करने में मदद मिलेगी।
राजस्थान में PM-KUSUM योजना की प्रगति
राजस्थान पहले से ही सौर ऊर्जा के क्षेत्र में काफी प्रगति कर रहा है।
- अब तक 776 विकेन्द्रीकृत सौर संयंत्र लगाए जा चुके हैं।
- इन संयंत्रों से कुल 1,543 मेगावाट बिजली का उत्पादन हो रहा है, जिसमें से 1,420 मेगावाट सिर्फ पिछले डेढ़ साल में जोड़ा गया है।
- वर्तमान में, 1 लाख से भी ज़्यादा किसान दिन के समय सौर ऊर्जा से अपनी खेती कर रहे हैं।
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किसानों के लिए इसका क्या मतलब है?
यह निर्णय किसानों के जीवन में कई सकारात्मक बदलाव लाएगा:
- कम समय में कनेक्शन: किसानों को अब बिजली कनेक्शन के लिए लंबा इंतज़ार नहीं करना पड़ेगा।
- डीजल पर निर्भरता कम: सौर ऊर्जा से सिंचाई करने से डीजल पंपों पर निर्भरता कम होगी, जिससे लागत में बचत होगी।
- बेहतर फसल और आमदनी: बिजली की उपलब्धता से बेहतर सिंचाई होगी, जिससे फसल की पैदावार बढ़ेगी और किसानों की आमदनी में भी इज़ाफ़ा होगा।
मुख्यमंत्री का यह कदम किसानों के लिए एक ऐतिहासिक फैसला है। यह सिर्फ एक नीतिगत बदलाव नहीं, बल्कि राजस्थान के किसानों के लिए एक नई शुरुआत है, जो उन्हें टिकाऊ और आत्मनिर्भर खेती की दिशा में आगे बढ़ाएगा।

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