भारत सरकार ने ₹1500 करोड़ की क्रिटिकल मिनरल रीसाइक्लिंग योजना को मंजूरी दी है। इस स्कीम के तहत ई-कचरे और बैटरी अपशिष्ट से Lithium, Cobalt और Nickel जैसे खनिज निकाले जाएंगे।

सरकार का बड़ा कदम
भारत सरकार ने हाल ही में ₹1500 करोड़ की क्रिटिकल मिनरल रीसाइक्लिंग योजना को मंजूरी दी है। इस योजना के तहत इलेक्ट्रॉनिक कचरे (E-Waste) और बैटरी अपशिष्ट से Lithium, Cobalt और Nickel जैसे महत्वपूर्ण खनिज निकाले जाएंगे। इन खनिजों का उपयोग स्मार्टफोन, लैपटॉप, इलेक्ट्रिक वाहन और अन्य तकनीकी उपकरणों में किया जाता है। अभी तक भारत को इन खनिजों के लिए विदेशों पर निर्भर रहना पड़ता था, लेकिन यह योजना उस निर्भरता को कम करेगी।
क्यों ज़रूरी है यह योजना?
आज के दौर में तकनीक पर निर्भरता लगातार बढ़ रही है। इलेक्ट्रिक वाहन, मोबाइल और गैजेट्स की मांग के साथ-साथ Lithium, Cobalt और Nickel जैसे खनिजों की जरूरत भी तेजी से बढ़ रही है। भारत में इन खनिजों का भंडार सीमित है, इसलिए अभी तक हमें इन्हें चीन और अन्य देशों से महंगे दामों पर आयात करना पड़ता था। यह न केवल हमारी अर्थव्यवस्था पर बोझ डालता है बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए भी चुनौती है। यही वजह है कि सरकार ने इस योजना की शुरुआत की है।
इस योजना के मुख्य उद्देश्य
इस स्कीम का सबसे बड़ा उद्देश्य भारत को खनिजों के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाना है। सरकार चाहती है कि देश में रीसाइक्लिंग उद्योग को बढ़ावा मिले और हम अपने ही ई-कचरे से इन कीमती खनिजों को निकाल सकें। इसके साथ ही यह योजना आयात पर निर्भरता को कम करने, रोजगार और स्टार्टअप को प्रोत्साहन देने और पर्यावरण संरक्षण सुनिश्चित करने के लिए भी बनाई गई है।
भारत को मिलने वाले फायदे
इस योजना के कई फायदे होंगे। सबसे पहले, भारत को विदेशी बाजारों से महंगे दाम पर खनिज खरीदने की जरूरत नहीं पड़ेगी। इससे विदेशी मुद्रा भंडार बचेगा और अर्थव्यवस्था मजबूत होगी। दूसरा, रीसाइक्लिंग उद्योग और खनिज पुनः प्राप्ति से जुड़े स्टार्टअप्स और उद्योगों को बढ़ावा मिलेगा, जिससे नए रोजगार पैदा होंगे। तीसरा, ई-कचरे का सही तरीके से निपटान होने से प्रदूषण और पर्यावरणीय खतरे कम होंगे।
आत्मनिर्भर भारत की दिशा में कदम
भारत सरकार की यह स्कीम सिर्फ एक सब्सिडी योजना नहीं है, बल्कि आत्मनिर्भर भारत की ओर एक बड़ा कदम है। जब भारत खुद Lithium और Cobalt जैसे खनिजों का उत्पादन करेगा, तब इलेक्ट्रिक वाहन और इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योग को सीधा लाभ मिलेगा। इससे न केवल तकनीकी विकास तेज होगा बल्कि भारत एक मजबूत और आत्मनिर्भर देश बनेगा।
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निष्कर्ष
₹1500 करोड़ की क्रिटिकल मिनरल रीसाइक्लिंग योजना भारत के भविष्य के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। यह योजना हमारी अर्थव्यवस्था को मजबूत करेगी, पर्यावरण की रक्षा करेगी और आत्मनिर्भर भारत के सपने को साकार करने की दिशा में एक बड़ा कदम होगी। यह साबित करती है कि भारत अब सिर्फ उपभोग करने वाला देश नहीं बल्कि खुद संसाधन बनाने वाला देश बनने की राह पर है।
FAQs
- यह ₹1500 करोड़ की योजना क्या है? यह एक सरकारी सब्सिडी योजना है जो ई-कचरे और पुरानी बैटरियों से महत्वपूर्ण खनिजों को निकालने के लिए शुरू की गई है।
- इस योजना का क्या फायदा होगा? यह भारत की आयात पर निर्भरता कम करेगी, रीसाइक्लिंग उद्योग को बढ़ावा देगी और पर्यावरण को सुरक्षित रखने में मदद करेगी।
- कौन से खनिज वापस मिलेंगे? लिथियम, कोबाल्ट, निकल और अन्य महत्वपूर्ण खनिज, जिनका उपयोग स्मार्टफोन और इलेक्ट्रिक वाहनों में होता है।
- इस योजना से किसे लाभ होगा? मुख्य रूप से ई-कचरा और बैटरी रीसाइक्लिंग करने वाली कंपनियों और स्टार्टअप्स को इसका लाभ मिलेगा।

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