केरल सरकार ने PM SHRI Scheme 2025 के कार्यान्वयन को रोका। जानें, 7 सदस्यीय पैनल का गठन क्यों हुआ और इस फैसले का शिक्षकों, स्कूलों और केंद्रीय फंडिंग पर क्या असर होगा। पीएम श्री योजना अपडेट और शिक्षा पर प्रभाव की पूरी जानकारी।
केरल में रोकी गई पीएम श्री योजना — जानिए सरकार ने क्यों लिया ये फैसला!

केरल की शिक्षा नीति को लेकर एक बड़ा फैसला सामने आया है। राज्य सरकार ने केंद्र की महत्वाकांक्षी पीएम श्री (Pradhan Mantri Schools for Rising India – PM SHRI) योजना के क्रियान्वयन को तत्काल प्रभाव से रोक दिया है और इसकी गहन समीक्षा के लिए 7-सदस्यीय मंत्री स्तरीय समिति का गठन किया है। यह फैसला राज्य के राजनीतिक गलियारों में गरमाहट पैदा करने वाला है, क्योंकि सरकार ने कुछ ही समय पहले इस योजना में शामिल होने के लिए केंद्र के साथ समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए थे।
यह कदम सत्तारूढ़ लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट (LDF) गठबंधन के भीतर हुए कड़े विरोध के बाद आया है, खासकर गठबंधन के प्रमुख सहयोगी भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (CPI) की तरफ से। CPI ने इस योजना को राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 को अप्रत्यक्ष रूप से लागू करने के केंद्र सरकार के प्रयास के रूप में देखा, जिसका केरल में वाम दल लगातार विरोध करते रहे हैं। इस राजनीतिक तनाव को शांत करने और राज्य के शैक्षिक हितों की रक्षा के लिए ही यह समीक्षा समिति बनाई गई है।
शिक्षकों, स्कूलों और केंद्रीय फंडिंग पर इसका क्या होगा असर?
केरल सरकार के इस फैसले का सीधा असर स्कूल विकास योजना और शिक्षा क्षेत्र से जुड़े हितधारकों पर पड़ेगा:
- स्कूलों पर असर: जिन स्कूलों को पीएम श्री योजना के तहत मॉडल स्कूल के रूप में विकसित करने के लिए चुना जाना था, उनमें फिलहाल आधुनिकीकरण और बुनियादी ढांचे के उन्नयन का काम रुक जाएगा। योजना के तहत मिलने वाली अनुमानित केंद्रीय सहायता अब समिति की रिपोर्ट आने तक ठंडे बस्ते में चली जाएगी।
- शिक्षकों पर असर: PM SHRI स्कूलों में NEP 2020 के तहत नया शिक्षण-प्रशिक्षण (pedagogy) और प्रौद्योगिकी-आधारित शिक्षा शुरू की जानी थी। अब यह सब समीक्षा प्रक्रिया पूरी होने तक लंबित रहेगा। शिक्षकों को उम्मीद थी कि इस योजना से कौशल विकास और नई शिक्षण पद्धतियों को अपनाने का मौका मिलेगा।
- केंद्रीय फंडिंग और वित्तीय दबाव: यह फैसला सबसे अधिक केंद्रीय फंडिंग पर असर डाल सकता है। केरल सरकार ने मुख्य रूप से समग्र शिक्षा अभियान (SSA) के तहत केंद्र से अटके हुए ₹1,500 करोड़ तक के फंड को प्राप्त करने के लिए ही इस योजना में शामिल होने का फैसला किया था। SSA की फंडिंग को अक्सर Modi Education Scheme (पीएम श्री योजना) से जोड़कर देखा जाता है। अब योजना को रोकने से केंद्रीय फंड की प्राप्ति फिर से अधर में लटक सकती है, जिससे राज्य के अन्य शैक्षिक कार्यक्रम प्रभावित हो सकते हैं।
PM SHRI Scheme के प्रमुख उद्देश्य क्या हैं?
PM SHRI Scheme 2025 केंद्र सरकार की एक केंद्र प्रायोजित योजना है, जिसे देशभर के 14,500 से अधिक मौजूदा स्कूलों को आदर्श विद्यालयों (मॉडल स्कूल्स) के रूप में विकसित करने के लिए शुरू किया गया है।
इसके मुख्य उद्देश्य हैं:
- NEP 2020 का प्रदर्शन: इन स्कूलों को राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के सभी घटकों को लागू करने के लिए एक ‘लाइटहाउस’ के रूप में तैयार करना।
- आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर: स्मार्ट क्लासरूम, पुस्तकालय, विज्ञान प्रयोगशालाएँ, व्यावसायिक शिक्षा और हरित परिसर (Green Campus) जैसी सुविधाओं के साथ स्कूलों के बुनियादी ढांचे को उन्नत करना।
- समग्र और अनुभवात्मक शिक्षा: रटने की बजाय अनुभवात्मक (Experiential), समावेशी (Inclusive) और आनंदमय शिक्षण पर जोर देना।
- 21वीं सदी के कौशल: छात्रों में आलोचनात्मक सोच, समस्या-समाधान और अन्य 21वीं सदी के कौशलों को विकसित करना।

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समीक्षा के बाद अपेक्षित परिणाम
गठित की गई 7-सदस्यीय पैनल का मुख्य उद्देश्य PM SHRI योजना की शर्तों, वित्तीय निहितार्थों और राज्य की शिक्षा नीति पर इसके संभावित प्रभाव का गहन अध्ययन करना है।
अपेक्षित है कि यह समिति:
- राज्य की स्वायत्तता की रक्षा: यह सुनिश्चित करने के तरीके सुझाएगी कि केंद्रीय सहायता लेने के बावजूद केरल की पाठ्यक्रम, भाषा नीति और शिक्षण-पद्धति पर राज्य सरकार का पूर्ण नियंत्रण बना रहे।
- वित्तीय रोडमैप: योजना को पूरी तरह अस्वीकार करने या उसमें संशोधन के साथ आगे बढ़ने पर केंद्रीय फंड की संभावित हानि या लाभ का आकलन करेगी।
समिति की रिपोर्ट ही केरल में PM SHRI योजना के भविष्य का रास्ता तय करेगी, यह दिखाते हुए कि राज्य अपने शैक्षिक सिद्धांतों और केंद्र की फंडिंग की आवश्यकता के बीच कैसे संतुलन स्थापित करता है।

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