फसल बीमा के नाम पर ₹1, ₹3, ₹5 का मुआवजा? कृषि मंत्रालय का सख्त आदेश और किसानों के लिए नया सहारा!
प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत किसानों को मिल रहे नाममात्र के दावों पर कृषि मंत्रालय ने लिया सख्त एक्शन। जानिए सरकार के नए निर्देश और किसानों को कैसे मिलेगा उचित मुआवजा।
नमस्ते किसान भाइयों और बहनों! क्या आप भी उन किसानों में से हैं, जिन्हें कड़ी मेहनत के बाद फसल खराब होने पर प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) के तहत ₹1, ₹3 या ₹5 जैसे नाममात्र के मुआवजे मिले हैं? अगर हाँ, तो यह खबर आपके लिए राहत भरी हो सकती है। हाल ही में ऐसी शिकायतों पर केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने सख्त रुख अपनाया है और इस ‘मज़ाक’ को तुरंत बंद करने का आदेश दिया है। आइए, जानते हैं इस पूरी खबर को विस्तार से और समझते हैं कि सरकार अब किसानों को उचित मुआवजा दिलाने के लिए क्या कदम उठा रही है।

पीएमएफबीवाई: किसानों के लिए एक सुरक्षा कवच
प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) की शुरुआत 13 जनवरी 2016 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा की गई थी. इसका मुख्य उद्देश्य प्राकृतिक आपदाओं, कीटों और बीमारियों के कारण होने वाले फसल नुकसान के खिलाफ किसानों को व्यापक बीमा कवरेज और वित्तीय सहायता प्रदान करना है. यह योजना किसानों की आय को स्थिर करने, उन्हें खेती जारी रखने में मदद करने और आधुनिक कृषि पद्धतियों को अपनाने के लिए प्रोत्साहित करने के लिए डिज़ाइन की गई थी.
योजना का उद्देश्य
- प्राकृतिक आपदाओं से फसल को हुए नुकसान पर किसानों को वित्तीय सहायता देना.
- किसानों की आय को स्थिर कर उन्हें खेती में बने रहने के लिए प्रोत्साहित करना.
- नवीन और आधुनिक कृषि पद्धतियों को अपनाने के लिए किसानों को बढ़ावा देना.
- कृषि क्षेत्र में ऋण प्रवाह सुनिश्चित करना, जिससे खाद्य सुरक्षा और कृषि विकास में मदद मिले.
किसानों को ₹1, ₹3, ₹5 के दावे: एक ‘मज़ाक’!
हाल ही में, प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत किसानों को मिल रहे मुआवजे की राशि को लेकर कई चौंकाने वाली रिपोर्टें सामने आई हैं. कई किसानों को ₹1, ₹3, ₹5 या यहाँ तक कि ₹21 जैसे बेहद कम राशि के दावे मिले, जिसने इस महत्वपूर्ण योजना की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े कर दिए. केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने इन ‘नाममात्र’ के भुगतानों को किसानों के साथ ‘भद्दा मज़ाक’ और ‘अन्याय’ बताया है.
ऐसे कम दावों के पीछे के कारण
इन बेहद कम दावों के पीछे कई कारण बताए जा रहे हैं, जिनमें शामिल हैं:
- राज्य सरकारों और बीमा कंपनियों के बीच विवाद.
- राज्यों द्वारा प्रीमियम सब्सिडी जारी करने में देरी.
- बैंकों द्वारा बीमा प्रस्तावों को गलत या देर से जमा करना.
- फसल नुकसान के आकलन में विसंगतियां और पारदर्शिता की कमी.
- किसानों में योजना के नियमों और दावा प्रक्रिया के बारे में जागरूकता की कमी.
- दावों के निपटान में देरी, कभी-कभी 18 महीने तक का समय लगना.

केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान का सख्त निर्देश
केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने इस मामले पर संज्ञान लेते हुए एक उच्च-स्तरीय बैठक की. उन्होंने साफ कहा कि किसानों को किसी भी हालत में परेशान नहीं होने दिया जाएगा और ऐसे ‘मज़ाक’ वाले दावों को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. मंत्री ने तत्काल प्रभाव से कई महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए हैं:
- गहन जांच के आदेश: पीएमएफबीवाई के सीईओ को निर्देश दिया गया है कि वे ऐसे सभी मामलों की ऑन-फील्ड जांच करें, जहाँ किसानों को ₹1 से ₹5 तक के दावे मिले हैं. इसमें स्थानीय कलेक्टरों और प्रभावित किसानों से सीधी बात करना भी शामिल है.
- सटीक क्षति आकलन: उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि फसल नुकसान का आकलन सटीक और वैज्ञानिक तरीकों से किया जाए. इसमें सैटेलाइट इमेजरी, रिमोट सेंसिंग, ड्रोन और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसी आधुनिक तकनीकों का उपयोग सुनिश्चित किया जाएगा.
- शीघ्र भुगतान: बीमा कंपनियों को निर्देश दिया गया है कि वे दावों का निपटान शीघ्रता से और एकमुश्त करें, ताकि किसानों को समय पर उनका पूरा मुआवजा मिल सके.
- योजना में संशोधन: पीएमएफबीवाई के प्रावधानों में आवश्यक संशोधन करने का निर्देश दिया गया है ताकि किसी भी विसंगति को दूर किया जा सके.
- राज्यों की जवाबदेही: मंत्री ने कहा कि जो राज्य सरकारें अपनी प्रीमियम सब्सिडी जमा करने में देरी करेंगी, उन पर खरीफ 2025 सीज़न से 12% ब्याज जुर्माना लगाया जाएगा. यह ब्याज सीधे किसानों को दिया जाएगा.
- बीमा कंपनी प्रतिनिधियों की उपस्थिति: फसल सर्वेक्षण के दौरान बीमा कंपनी के प्रतिनिधियों की उपस्थिति अनिवार्य कर दी गई है ताकि पारदर्शिता बनी रहे.
सरकार की कार्य योजना और सुधार
केंद्र सरकार लगातार पीएमएफबीवाई को मजबूत करने और किसानों के लिए इसे अधिक प्रभावी बनाने के लिए काम कर रही है:
- तकनीकी एकीकरण: नेशनल क्रॉप इंश्योरेंस पोर्टल (NCIP) के साथ भूमि रिकॉर्ड का एकीकरण किया गया है. फसल बीमा मोबाइल ऐप किसानों को आसानी से पंजीकरण करने और फसल नुकसान की रिपोर्ट 72 घंटे के भीतर दर्ज करने की सुविधा देता है.
- डिजिक्लेम मॉड्यूल: दावों की पारदर्शी गणना और निपटान के लिए डिजिक्लेम मॉड्यूल विकसित किया गया है, जिसके माध्यम से सीधे किसानों के खातों में भुगतान किया जाता है.
- बढ़ी हुई कवरेज: अब पीएमएफबीवाई में कटाई के बाद के नुकसान (पोस्ट-हार्वेस्ट लॉस) को भी शामिल किया गया है, बशर्ते नुकसान कटाई के 14 दिनों के भीतर हुआ हो.
- स्वैच्छिक योजना: 2020 से यह योजना सभी किसानों के लिए स्वैच्छिक कर दी गई है.
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किसानों के लिए शिकायत निवारण प्रक्रिया
यदि आपको पीएमएफबीवाई से संबंधित कोई समस्या आती है या आपके दावे का निपटान ठीक से नहीं होता है, तो आप इन माध्यमों से शिकायत दर्ज कर सकते हैं:
- ब्लॉक/जिला और राज्य स्तरीय समितियां: पीएमएफबीवाई के परिचालन दिशानिर्देशों में एक स्तरीय शिकायत निवारण तंत्र का प्रावधान है. आप ब्लॉक/जिला स्तर के शिकायत निवारण अधिकारी या जिला स्तरीय शिकायत निवारण समिति (DGRC) और राज्य स्तरीय शिकायत निवारण समिति (SGRC) से संपर्क कर सकते हैं.
- कृषि रक्षक पोर्टल और हेल्पलाइन: किसान अपनी शिकायतों, चिंताओं या प्रश्नों को दर्ज करने के लिए टोल-फ्री हेल्पलाइन नंबर 14447 और कृषि रक्षक पोर्टल का उपयोग कर सकते हैं. यह एक एकीकृत शिकायत निवारण तंत्र है.
- बीमा कंपनी से सीधा संपर्क: नुकसान की स्थिति में, किसानों को घटना के 72 घंटों के भीतर अपनी बीमा कंपनी को सूचित करना आवश्यक है.
- एसएमएस अलर्ट: दावा निपटान होने पर, किसानों को एक लिंक के साथ एसएमएस भेजा जाता है जिससे वे अपने भुगतान की स्थिति को ट्रैक कर सकते हैं.
सरकार के इन सख्त निर्देशों और लगातार किए जा रहे सुधारों से उम्मीद है कि प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना किसानों के लिए एक वास्तविक ‘सुरक्षा कवच’ बनेगी और भविष्य में उन्हें ₹1, ₹3 या ₹5 जैसे अपमानजनक दावे नहीं मिलेंगे। अपनी फसल का बीमा कराएं, जागरूक रहें और अपने अधिकारों के लिए आवाज उठाएं!

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